मौजूदा हालात और मेरा देश

मौजूदा हालात और मेरा देश

By Rashid Ameen Malai

लोग समझे नहीं प्यार की गुफ़्तगू
सिर्फ आपस में तकरार होती रही

हम ने मिलना भी चाहा है बाहम गले
बीज नफ़रत के सरकार बोती रही

उन को एक ज़ख़्म ही पर नहीं है क़रार
रोज़ ज़ख़्मों की भरमार होती रही

इस्मतें लुट गईं दिन दहाड़े यहाँ
गहरी नींदों में सरकार सोती रही

अब नहीं उस को पहचान मासूम की
कितनी आवारा तलवार होती रही

 

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